Value added services:- इस तरह की सेल्लिंग तकनीक सेलर तब काम में लेता है जब बयर किसी प्रोडक्ट की कम कीमत और अच्छी क्वालिटी चाहता हो | इसमें सेलर को प्रोडक्ट / सर्विस को सेल करने के लिए अच्छी कोशिश करनी पड़ती है ,जो बयर उसके प्रोडक्ट को बय कर ले |
वैल्यू एडेड सेल्लिंग में सेलर को कस्टमर की प्रेजेंट और फ्यूचर की जरूरत को समझना पड़ता है और कस्टमर की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट में वैल्यू ऐड करके कस्टमर को ऑफर करना होता है | इस तरह की सेल्लिंग में दोनों बयर और सेलर किसी तरह का रिलेशन बनाने में इंट्रेस्टेड नहीं होते |
Value Added Selling/वैल्यू एडेड सेल्लिंग :- उद्धरण से समझते हैं , जैसे कि विकास को एक एंड्राइड फ़ोन की जरूरत है वह फ़ोन खरीदने किसी फ़ोन विक्रेता के पास जाता है और दुकानदार से एंड्राइड फ़ोन (Samsung) की मांग करता है (जिस तरह के फंक्शन और फीचर्स उसको फ़ोन में चाहिए) |
दुकानदार उसकी क्वेरी (Query) को अच्छे से समझता है और उसको कोई और एंड्राइड फ़ोन (Vivo) को ऑफर करता है ,जिसकी कीमत सैमसंग से कम है ,क्वालिटी ,फंक्शनिंग और फीचर्स में सैमसंग से अच्छा है | इतना जानने के बाद विकास भी फ़ोन खरीद लेता है और दुकानदार अपना प्रोडक्ट सेल करने में सफल रहता है |
यहाँ पे हुआ कुछ यूँ है कि दुकानदार ने कम कीमत ,अच्छी फंक्शनिंग और फीचर्स को ऐड किया है |
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